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मिजोरम की कला और संस्कृति एवं मिजोरम की पूरी जानकारी

आज हम भारत के ऐसे राज्य का वर्णन करने वाले है जो भारत के सबसे छोटे राज्यों में गिना जाता है | मिजोरम भारत के उतर पूर्व में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत राज्य है |मिंजोरम प्रकृति की सुंदरताओं को सजोता हुआ एक बहुत ही सुन्दर राज्य है हम मिजोरम की कला और संस्कृति और मिजोरम की पूरी जानकारी को इस पोस्ट में जानेंगे |

मिजोरम नाम इनकी मूल जनजाति “मिजो” के नाम पर पड़ा था । मिजोरम नाम का मतलब “पहाड़ों की भूमि” होता है यह पहाड़ो की भूमि है भी । मिजोरम पहले असम राज्य का जिला एक जिला हुआ करता था लेकिन फरवरी 1987 में इसे असम से अलग करके भारत के 23वें राज्य के रूप में दर्जा प्रदान किया गया। राज्य बनने से पहले मिजोरम को “लुशाई पर्वतीय जिले” के रूप में जाना जाता था ।

मिजोरम में आपको प्रवेश लेने से पहले आपको इनर लाइन परमिट ( ILP) लेना पड़ेगा | मिजोरम की राजधानी आइजोल के एअरपोर्ट पर (ILP ) को चेक किया जाता है । मिजोरम राज्य पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण जगह है।मिजोरम की कला और संस्कृति एवं प्रकृतिक सुंदरता और यहाँ के ऊँचे ऊँचे पहाड़ो को देखने दुनिया भर से पर्यटक आते है । मिजोरम बहुत ही शांत जगह हैं प्रदूषण नहीं के बराबर है । यहाँ जाकर जो आपको शांति मिलेगी वैसी आपको सिटी में कभी नहीं मिलेगी ।

मिजोरम को भारत का “सोंगबर्ड ऑफ़ इंडिया” के नाम से भी जाना जाता है। मिजोरम में पर्यटकों के लिए कोई भी मौसम हो हर मौसम सुनहरा रहता है । क्या आपको पता है मिजोरम को 21 खूबसूरत पहाड़ी श्रृंखलाओं के लिए भी जाना जाता है। अगर आप मिजोरम की कला और संस्कृति और मिज़ोरम की पूरी जानकारी लेना चाहते है तो इस पोस्ट को विस्तार से पढ़िए


आइये जानते है मिजोरम की कला और संस्कृति और मिज़ोरम की पूरी जानकारी के बारे में –

1 . मिजोरम राज्य का इतिहास

मिजोरम की कला और संस्कृति में सबसे पहले हम यहाँ का इतिहास के बारे में जानेगे
ऐसा कहा जाता है की जब मिजो ट्राइब्स ने चीन की सीमा पार की तब से मिजोरम के इतिहास के बारे में कुछ जानकारी मिलती है। 16वी शताब्दी में मिजोरम का इतिहास अस्तित्व में आया। मिजोरम में 18वी और 19वी शताब्दी में बहुत जनजातीय युद्ध हुए । मिंजोरम 1891 में ब्रिटिश कब्जे में चला गया |इसके कुछ वर्षों बाद उत्तर का लुशाई पर्वतीय क्षेत्र असम और आधा दक्षिणी भाग बंगाल के अधीन रहा ।

1898 में दोनों राज्यों ने मिलकर मिजोरम को एक जिला बना दिया गया जिसका नाम —लुशाई हिल्स जिला पड़ा फिर यह असम के प्रशासन के कंट्रोल में आ गया। 1972 में पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम लागू हुआ जिसके बाद मिजोरम को एक केंद्रशासित प्रदेश का दर्ज़ा दिया गया। इसके 14 साल बाद भारत सरकार और मिज़ो नेशनल फ्रंट के बीच 1986 में एक समझौते हुआ जिसके बाद 20 फरवरी, 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया ।

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2 . मिज़ोरम का भूगोल

मिजोरम की कला और संस्कृति में अब हम मिज़ोरम का भूगोल जानेगे | मिज़ोरम पूर्व और दक्षिण में म्यांमार और पश्चिम में बांग्लादेश के बीच स्थित है | इसके के कारण भारत के पूर्वोत्तर कोने में स्थित मिजोरम को सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है। मिंजोरम विभिन्न प्रजातियों के प्राणियों तथा वनस्पतियों से संपन्न है।मिंजोरम की राजधानी आइजोल है और यह मिंजोरम का सबसे बड़ा शहर भी है |


। 19वीं शताब्दी में यहां ब्रिटिश मिशनरियों का प्रभाव के कारण अधिकांश मिज़ो लोग ईसाई धर्म को ही मानते हैं। मिज़ो भाषा की अपनी कोई लिपि मौजूद नहीं है। मिशनरियों ने मिज़ो भाषा और औपचारिक शिक्षा के लिए रोमन लिपि को अपनाया। मिज़ोरम भारत का दूसरा सबसे साक्षर राज्य है यहाँ की साक्षरता की दर 91% से भी ज्यादा है |

3. मिजोरम की भाषा – मिजोरम की कला और संस्कृति

मिजोरम की प्रमुख भाषा “मिज़ो” है। मिजोरम में ज्यादातर मिज़ो जाती के लोग ही रहते है। इसलिए मिजो यहाँ की स्थानीय भाषा है । हालाकि समय के साथ अब हिंदी और अंग्रेजी भाषा की अधिकता भी हो गई है। आज की नई पीढ़ी के लोग हिंदी और अंग्रेजी भाषा जानते है | परन्तु मिजोरम के पुराने वृद्ध लोग मिज़ो के अलावा अन्य कोई भाषाएँ कम ही जानते है।

4. मिजोरम का त्योहार

मिजोरम के लोगो की कृषि पर निर्भरता ज्यादा है इसलिए यहाँ के प्रमुख त्यौहार भी कृषि से ही सम्बंधित है।मिजोरम की कला और संस्कृति में त्यौहार का बहुत महत्त्व है | मिजोरम के लोग अपने हर त्यौहार को बहुत ही आनद से मनाते है। अलग–अलग त्यौहार के अपने अलग ही रंग होते है और यह यहाँ की वेशभूषा में भी साफ़ झलकता है । मिजोरम के लोग आपस में मिल जुलकर सभी त्यौहारों का आयोजन करते है।

यह उनकी आपसी एकता को दिखाता है | मिजोरम में मार्च के महीने में त्यौहार ‘छपरा कुट’ बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है, यह त्यौहार मुख्य रूप से फसलों की कटाई से सम्बंधित होता है। इस उत्सव में चेरव और बांस नृत्यों का आयोजन किया जाता हैं। मिजोरम में अगस्त और सितम्बर माह में मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार “मीम कुट” भी बहुत हर्षोउल्लाश से मनाया जाता है।

मीम कुट बहुत ही धार्मिक त्यौहार होता है जो मरने वाले लोगो के सम्म्मान में रोटी, सब्जियां तथा मक्का से मनाया जाता है। मीम कुट त्यौहार में भी मुख्य रूप से नृत्य किया जाता है। मिजोरम के लोग की फसलों की कटाई पूरी होने के बाद है एक और त्यौहार “पावल कुट” मनाया जाता है यह त्यौहार 2 दिन तक चलता हैं। नवम्बर और सितम्बर के महीने में थाफलावांग कुट त्यौहार भी मनाया जाता हैं। इन सभी त्यौहारों को देखने मिज़ोरम की प्राकृतिक सुंदरता और मिजोरम की कला और संस्कृति को देखने हजारो पर्यटक मिज़ोरम आते है |

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5. मिजोरम का पहनावा

मिज़ोरम के लोग अलग अलग त्योहारों में अलग अलग ड्रेस पहनते है |मिज़ोरम का पहनावा बहुत ही आकर्षक लगता है | मिज़ोरम का पहनावा मिज़ोरम में आने वाले हर पर्यटक के आकर्षण का केंद्र होता है | मिजोरम का पहनावा मिजोरम की कला और संस्कृति की झलक दिखाता है | इनमे उनके द्वारा हर फेस्टिवल में अलग प्रकार की पोशाके पहनी जाती है। मिजोरम की महिलाये नृत्य करते समय कव्रेची ब्लाउस को पौंची के साथ पहनती है। यह उनका ट्रेडिसनल पहनावा होता है ।

मिजोरम की पारंपरिक पोशाक में सफ़ेद और काले रंग ज्यादा देखने को मिल जाते है। महिलाओं की खास ड्रेस में पुंछी ड्रेस है, जोकी बहुत ही आकर्षक लगती है |जबकि लूसी जनजाति की महिलाए सूती स्कर्ट को पहनती है। और मिजोरम के पुरुष साधारण कपडे पहनते है जो लाल और सफ़ेद रंगों के बने होते है | हालाँकि मिज़ोरम की सिटी में आपको वेस्टर्न कल्चर दिखाई देगी आज के युवा पीढ़ी पर वेस्टर्न कोरियाई कल्चर का प्रभाव दिखाई देगा |

6 . मिजोरम का मुख्य भोजन

मिजोरम की कला और संस्कृति – मिजोरम पूर्वोत्तर क्षेत्र में होने के कारण चावल की खेती के लिए जाना जाता है । मिजोरम के लोग चावल खाना काफी पसंद करते है। चावल के आलावा मिजोरम में मांस, मछलियाँ तथा ताज़ी सब्जियां भी बहुतायत में खायी जाती है | अगर मिज़ोरम के प्रसीद भोजन की बात करे तो इसमें मच गरीब, वौक्सा रेप, अरसा बुछिकर, कोठा पीठा, पूअर मच और दाल भी बहुत खायी जाती है ।

क्या आपको पता है मिजोरम में खाना केले के पत्तों में परोसा जाता है जो यहाँ की संस्कृति का हिस्सा है | मिजोरम के लोगो को सरसों के तेल में पका हुआ खाना काफी पसंद है और कम तेल में फ्राई किया जाने वाला खाना आपको यहाँ देखने को मिल जायगा |

7 .मिजोरम के बारे में ऐतिहासिक तथ्य

मिज़ोरम के लोग मंगोलियन नस्ल के है |
ऐसा माना जाता है कि शुरू में मिजो लोग बर्मा के शान राज्य में रहते थे।
19वी शताब्दी में मिजो लोग ईसाई धर्म प्रचारको के प्रभाव से बहुत से मिजो लोगो ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था ।
मिज़ोरम में अनेक कबीले होते है, जैसे :— लुशाई, पवई, पैथ, राल्ते, पैंग, हमार, कुकी, मारा और लाखें।
सन् 1954 में पर इसका नाम मिजो पहाडी के नाम पर रखा गया ।
सन् 1972 में इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया तब इसका नाम मिजोरम कर दिया।
मिजोरम का क्षेत्रफल कुल 21081 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार 1097206 थी।

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8 . मिजोरम घूमने लायक पर्यटन स्थल

मिजोरम में पर्यटन के लिए बहुत ही खूबसूरत जगह है। मिँज़ोरम में एक से बढ़कर एक सुन्दर स्थान है जो इस स्टेट की यात्रा आपको कभी नहीं भूलने वाली बना देगी | यहाँ पर में कुछ जगहों की जानकारी दे रहा हु |

8.1 आइजोल

आइजोल मिजोरम का सबसे बड़ा शहर और मिजोरम में घूमने वाली जगहों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आइजोल में हम्मिफांग, तामदिल झील और चानमारी जैसे शानदार पर्यटन स्थल है। इन आकर्षित स्थानों पर घूमकर आपकी यात्रा बहुत खूबसूरत हो जायगी |

8.2 वैंटावंग फॉल्स

मिजोरम में पर्यटन स्थानों में शामिल वैंटावंग फॉल्स मिजोरम का सबसे ऊंचा झरना और भारत का 13 वां सबसे ऊँचा झरना हैं। वैंटावंग फॉल्स मिजोरम का आकर्षण का केंद्र है | और यह मिज़ोरम की राजधानी आइजोल से लगभग 137 किलोमीटर की दूरी पर है ।

8.3 रेइक आइजोल

रेइक पहाड़ी मिजोरम की सबसे ऊँची पहाड़ी हैं जोकि 1600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। यह जगह यहाँ रोमांस करने के लिए कपल्स के लिए सबसे अच्छी है।यह राजधानी आइजोल से 29 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |

8.4 सेरछिप

सेरछिप में घूमने लायक स्थानों में छिन्गपुई ठलान और ह्रिंत्रेंगना फेफड़े बहुत प्रसिद्ध है। यह स्थान आपको बहुत ही अलग अनुभव का दिलाने वाला है।

8.5 लुंगलेई शहर

लुंगलेई का मतलब “चट्टान का पुल” होता है। लुंगलेई शहर राजधानी आइजोल के पास स्थित है। लुंगलेई में प्रकृति का ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा जैसे यहाँ सब कुछ हाथ से सजाया गया हो। प्रकृति प्रेमियों के लिए लुंगलेई बहुत ही खूबसूरत जगह है। लुंगलेई में आप ट्रेकिंग का आनंद भी ले सकते है। लुंगलेई अपनी खूबसूरत चट्टानों के कारण भी बहुत प्रसीद है।

8.6 चंपई

चम्पई मिजोरम राज्य का बहुत ही खूबसूरत शहर है। यह सुन्दर पहाड़ियों से सजा हुआ है। चम्पई में कुंग्रवी नाम की एक गुफा मौजूद है जो बहुत ही पुरानी और दर्शनीय गुफा मानी जाती है। इसके अलावा चम्पई में दर्शनीय स्थलों में तियु लुइ नामक नदी, रिहदिल झील, लियोनिहारी लुन्गलेन तलांग भी शामिल है।

8.7 ह्मुइफंग मिजोरम

मिजोरम के प्रमुख आकर्षण में शामिल ह्मुइफ़ांग एक खूबसूरत स्थान हैं। यह राजधानी आइज़ोल से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। यह हिल स्टेशन अपने साहसिक और वन्य जीवन की गतिविधियों के लिए पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।

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9. मिजोरम की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय

मिजोरम की यात्रा पर जाने के लिए सर्दियों का मौसम सबसे होता हैं क्योंकि इस मौसम में पर्यटकों को किसी तरह की असुविधा का सामना नही करना पड़ता हैं। हालाकि इस पहाड़ी क्षेत्र में किसी भी महीने में घूमने जा सकते है। लेकिन आप मिजोरम एवं यहाँ के पर्यटन स्थलों को घूमने का ज्यादा आनंद सर्दियों में ले पायेंगे।

10. मिजोरम में कहाँ रुके

मिँज़ोरम में रखने के लिए बहुत सी होटल्स मौजूद है मिजोरम में कई लो-बजट से लेकर हाई-बजट तक होटल मिल जायँगे हैं। में यहाँ पर कुछ प्रमुख होटल की सूची दे रहा हु |

होटल आरिनी (Hotel Arini)
जे आई टी होटल (I.T Hotel)
होटल रीजेंसी (Hotel Regency)
डेविड का होटल क्लोवर (David’s Hotel Clover)
द ग्रैंड आइज़ॉल (The Grand Aizawl)

मिजोरम कैसे जाए – How To Reach Mizoram


मिजोरम जाने के लिए फ्लाइट, ट्रेन और बस में से किसी भी तरह से जा सकते है। मिजोरम की राजधानी आइजोल अच्छी तरह से परिवहन से जुड़ा हुआ है आपको वहा जाने में कोई भी असुविधा नहीं होगी| आप आसानी से मिजोरम जा सकते है।

11.1 मिजोरम फ्लाइट से कैसे पहुँचे

यदि आपने मिजोरम की यात्रा के लिए आपने हवाई मार्ग से जाना चाहते है तो आप मिजोरम की राजधानी आइजोल के प्रमुख हवाई अड्डे के माध्यम से मिजोरम आसानी से पहुँच सकते है। आइजोल हवाईअड्डा गुआहाटी, कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा है |

11.2 ट्रेन से मिजोरम कैसे पहुँचे

यदि आपने मिजोरम की यात्रा ट्रेन से करना चाहते है तो मिजोरम के कोलासिब जिले के बैराबी शहर में मिजोरम का प्रमुख रेलवे स्टेशन मौजूद है। जिसके द्वारा आप आसानी से मिजोरम जा सकते है।

11.3 कैसे पहुंचे मिजोरम सड़क मार्ग से

मिजोरम पर्यटन स्थल एक नेशनल हाईवे पर स्थित है जोकि गुवाहाटी, सिलचर और शिलांग तक जाता है। यदि आप सड़क मार्ग से मिजोरम जाना चाहते है तो आपको यहाँ नियमित रूप से चलने वाली बसे मिल जाएगी। क्योंकि मिजोरम सड़क मार्ग के माध्यम से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है|

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आज हमने मिजोरम की कला और संस्कृति और इसकी पूरी जानकारी के बारे में विस्तार से जाना फिर भी कोई चीज़े छूट गयी हो तो कमेंट करके जरूर बताये और मेरी यह पोस्ट आपको कैसी लगी वो भी जरूर बताये कोई कमी हो तो कमेंट जरूर करे |

Categories: north east Culture
Deepak daga: मेरा नाम दीपक डागा है में पांचू में रहता हु में पार्ट टाइम ब्लोग्गर हु मेरा ब्लॉग hindifreedom.com को मैंने 24 may 2020 start किया था मेरा ब्लॉग को बनाने का मुख्य उद्देश्य पाठको को हिंदी भाषा में ज्यादा से ज्यादा वैल्युएबल जानकारी उपलब्ध कराना है मुझे नार्थ ईस्ट इंडिया की संस्कृति से काफी लगाव है इसलिए में वहा की कल्चर से जुडी जानकारी शेयर करना पसंद करता हु | आपको कोई मदद की जरुरत हो तो नीचे कमेंट जरूर करे |